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Wednesday, 18 May 2016

महिला सशक्तीकरण की बड़ी योजना है उज्ज्वलाः किरन श्रीवास्तव

भाजपा के सेक्टर संयोजक एवं सहयोगियों की बैठक हुई सम्पन्न
जौनपुर। भाजपा नगर इकाई के सभी कार्यकर्ता नरेन्द्र भाई मोदी के नेतृत्व की केन्द्र सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं को जन-जन तक पहंुचाने का कार्य पूरी तन्मयता से करेंगे। उक्त बातें नगर अध्यक्ष आशीष गुप्त ने नगर के सभी सेक्टरों की बैठक को सम्बोधित करते हुये कही। पंचमुखी हनुमान मंदिर बाबा जी की कुटिया मछलीशहर पड़ाव पर हुई बैठक में सभी सेक्टरों के संयोजक व सह संयोजक उपस्थित रहे। इस दौरान सेक्टर संयोजक डा. राम सूरत मौर्य, अमित श्रीवास्तव, बृजमोहन शुक्ल, गौरव श्रीवास्तव सहित अन्य वक्ताओं ने कहा कि केन्द्र सरकार 26 मई को अपना दो वर्ष का सफल कार्यकाल पूर्ण कर रही है। इस बाबत को 25 मई को विशाल मशाल जूलूस निकाला जायेगा जो राज कालेज के मैदान से शुरू होकर विसर्जन घाट नखास पर पहुंचकर समाप्त होगा। अन्त में सेक्टर संयोजक श्रीमती किरन श्रीवास्तव ने कहा कि उज्ज्वला योजना महिला सशक्तीकरण की एक बड़ी योजना है जिसमें करोड़ों गरीब परिवारों को निःशुल्क गैस कनेक्शन का लाभ मिलेगा। बैठक का संचालन नन्द लाल यादव ने किया। अन्त में आलोक सेठ ने सभी के प्रति आभार जताया। इस अवसर पर आलोक मिश्रा, रामसिंह मौर्या, विकास शर्मा, संतोष त्रिपाठी, अजय उपाध्याय, सभासद पति दयाराम गुप्ता, रामकृष्ण नारायणन, लोकेश गुप्त, कृष्णकांत साहू, सुनील गुप्ता, सुरेन्द्र अग्रहरि, राजेश गुप्ता के अलावा अन्य लोग उपस्थित रहे।

​फिट रहने के लिए करें जूम्बा

21 दिवसीय समर कैम्प में जुट रही लोगों की तादात
जौनपुर। नगर के ओलन्दगंज में स्थित डी.एक्टिवेट डांस क्लास में फिटनेस के दीवानों ने डांस का नया कॉन्सेप्ट जूम्बा फिटनेस किया। इसके तहत 17 से लेकर 50 साल तक के 50 से ज्यादा प्रतिभागियों ने हिस्सा
लिया। 21 दिवसीय समर कैम्प के चौथे दिन बुधवार को छोेटे बच्चों को बॉलीवुड, कन्टेम्परी, युवाओं और महिलाओं को जूम्बा फिटनेस, एरोबिक्स की ट्रेनिंग दी गयी। जूम्बा के एक्सपर्ट रोहित रेमो, चांद अहमद ने बताया कि यह यूएस का फिटनेस प्रोग्राम है। इसमें कई डिग्री के डांस होते हैं और इसके तहत एक घंटे में 500 से 800 कैलोरी तक बर्न होती हैं। इस फार्म में मस्ती के साथ लोग यह कसरत करे है। बॉलीवुड कोरियोग्राफर स्पेशलिस्ट सरफराज खान ने बताया कि इस इंस्टीट्यूट में छोटे बच्चों के अलावा युवाओं को बॉलीवुड के विभिन्न प्रकार के डांस की ट्रेनिंग दी जा रही है जिसमें बॉलीवुड फ्री स्टाइल, कन्टेम्परी शामिल है। डायरेक्टर राकेश निषाद और डीएस प्रिंस ने संयुक्त रूप से सभी के प्रति आभार प्रकट किया। इस मौके पर गोलू, एप्पल, वर्षा, युवराज, परी, रागी, सेजल, दीपू, राज, एकता सहित कई लोग मौजूद रहे।

Tuesday, 17 May 2016

यूपी में कृष्ण−सुदामा कब साथ पढ़ेंगे?

आशीष वशिष्ठ
2011 में तमिलनाडु के इरोड जिले के कलेक्टर आर. आनंदकुमार ने जब अपनी छह साल की बेटी को एक सरकारी स्कूल में दाखिल कराया, तो यह घटना एक राष्ट्रीय खबर बन गई। स्कूल के स्तर पर भी इसका असर देखने को मिला था। कलेक्टर की बच्ची के सरकारी स्कूल में जाते ही सरकारी अमले ने उस स्कूल की सुध लेनी शुरू कर दी और उसकी दशा पहले से बेहतर हो गई। जाहिर है, अगर यह अपवाद आम व्यवहार बन जाए तो बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। शायद इसी को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर, 2014 में केंद्र सरकार से कहा था कि जिस तरह से सरकारी मेडिकल कॉलेज सबसे अच्छे माने जाते हैं उसी तरह से सरकार देश भर में अच्छे स्कूल क्यों नहीं खोलती है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी पिछले साल अगस्त में एक महत्त्वपूर्ण फैसला देते हुए उत्तर प्रदेश सरकार से कहा था कि सरकारी अधिकारियों, कर्मचारियों और चुने हुए जनप्रतिनिधियों के बच्चे अनिवार्य रूप से सरकारी प्राइमरी स्कूलों में पढ़ें। और इसकी अवहेलना करने वालों पर कड़ी कार्रवाई हो। इस फैसले का आम जनता द्वारा तो खूब स्वागत किया गया, लेकिन संपन्न वर्ग की प्रतिक्रिया थी कि पालकों को यह आजादी होनी चाहिए कि उन्हें अपने बच्चों को कहां पढ़ाना है। हाईकोर्ट के इस आदेश के बावजूद उत्तर प्रदेश के मंत्री और नौकरशाह इस पर अमल के लिए तैयार नहीं हुए। पिछले दिनों जो खबरें आर्इं, उनके अनुसार उत्तर प्रदेश सरकार हाईकोर्ट के इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दाखिल करने की तैयारी में है। यह एक ऐसा दौर है जब तमाम ताकतवर और रुतबे वाले लोग सरकारी स्कूलों के निजीकरण' के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं।
हैरानी की बात यह है इलाहबाद हाई कोर्ट के आदेश के लगभग दस महीने बाद भी ऐसी एक भी खबर सुनने−पढ़ने को नहीं मिली कि यूपी के करीब 40 लाख सरकारी कर्मचारियों और अफसरों ने अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में दाखिला दिलाया है। सरकारी खजाने से वेतन पाने वालों में आईएएस, आईपीएस, आईएफएस अफसर, एलएलए, एमपी समेत सरकार से वेतन या मानदेय पाने वाला हर शख्स शामिल है।
पिछले दो−तीन दशकों में यह धारणा बलवती हुई कि कि हमारे यहां बड़े लोगों के बच्चे सरकारी प्राइमरी स्कूलों में नहीं पढ़ते। चूंकि समाज का प्रभावशाली और समर्थ वर्ग अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में नहीं पढ़ाता है इसलिए सरकारी स्कूल बदहाली और बदइंतजामी का शिकार हैं। वर्तमान में सरकारी स्कूल में जिस वर्ग या समूह के बच्चे शिक्षा ग्रहण करने जाते हैं। उस वर्ग के माता−पिता और  अभिभावक सरकारी मशीनरी के सामने हाथ बांधकर ही खड़े होते हैं। किसी रसूखदार या रूतबे वाला का बच्चा सरकारी स्कूल में जाए और मास्टर उसे पढ़ाने की बजाय टाइम पास करने की हिमाकत नहीं कर सकता है। जब सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाला बड़ा समूह समाज के वंचित, पिछड़े और गरीब लोगों का है तो वहां पढ़ाई या अन्य सुविधाओं को लेकर स्कूल प्रशासन या मंत्रालय का बेफिक्र होना कोई खास बात नहीं है।
यदि हम शिक्षा का स्तर सुधारना चाहते हैं तो शिक्षा प्रणाली बदलनी पड़ेगी। प्राइवेट स्कूल लगातार फल फूल रहे हैं, सरकारी स्कूल बेदम हैं। सर्व शिक्षा अभियान के तहत सरकारी स्कूलों की संख्या बढ़ी है, लेकिन सुधारों का सिलसिला रुक सा गया है। सबसे बड़ी मुश्किल शिक्षकों की तैनाती को लेकर खड़ी हुई है। उनकी कमी पूरे देश में है, पर उत्तर के राज्यों की स्थिति ज्यादा खराब है। उत्तर प्रदेश की स्थिति को संवारना आसान नहीं है और सरकार की इच्छा शक्ति लंबे समय से कमजोर रही है।
आज देश में बहुत बड़ी संख्या ऐसे प्राइवेट स्कूलों की है जो सरकार सहायता नहीं लेते। ये स्कूल अपना खर्च ऊंची फीस लेकर चलाते हैं। शहरी मध्य वर्ग अपने बच्चों को इन्हीं स्कूलों में पढ़ाना पसंद करता है। सरकारी अधिकारी और नेताओं के बच्चे इन्हीं स्कूलों में पढ़ते हैं। मामला सिर्फ वर्दी और अंग्रेजी का नहीं है। इन स्कूलों की साख इस कारण भी है कि वे कायदे से यानी नियम से चलते हैं। इनकी तुलना में सरकारी स्कूल कमजोर दिखते हैं। ये स्कूल लगभग मुफ्त शिक्षा देते हैं पर आज उनमें मुख्यतः निर्धन वर्गों और निचली जातियों के बच्चे दिखाई देते हैं। सर्व शिक्षा अभियान के तहत सरकारी स्कूलों की तादाद बढ़ी है। वैसे सरकारी अनुदान से चलने वाले स्कूल पहले से ही उत्तर प्रदेश में काफी बड़ी संख्या में रहे हैं। आज छोटे से छोटे गांव में प्राइमरी स्तर का सरकारी स्कूल है। उसके समानांतर गांव−गांव में अंग्रेजी माध्यम का दावा करने वाले प्राइवेट स्कूल खुल रहे हैं।
सामाजिक हवा का इशारा है कि पढ़ाई इन्हीं में होती है। सरकारी स्कूल में तो बस खाना मिलता है, वर्दी और वजीफा बंटता है। बच्चों के स्तर पर समाज का बंटवारा हो चुका है। जो भी थोड़ी बहुत हैसियत रखता है और फीस दे सकता है, अपने बच्चों को सरकारी स्कूल से हटा लेना चाहता है। उत्तर प्रदेश में निर्धन मजदूर और छोटे किसानों का वर्ग बहुत बड़ा है। इसलिए सरकारी स्कूलों में भी बच्चों की संख्या काफी बढ़ी है। शिक्षा का अधिकार कानून आने के बाद से इन स्कूलों की इमारत और सुविधाएं भी सुधरी हैं, पर एक समस्या लगातार बनी रही है और इधर के सालों में विकराल रूप लेती जा रही है, यह समस्या है शिक्षकों की कमी की। उत्तर प्रदेश में सरकारी प्राइमरी और सेकेंडरी स्कूलों में 270000 शिक्षकों की कमी है। कहीं−कहीं स्कूल इतने छोटे हैं कि बच्चों को पेड़ के नीचे बैठकर पढ़ना पड़ता है। हिंदी का टीचर कंप्यूटर पढ़ाता है और उर्दू का गणित पढ़ा रहा है।
इस समस्या का दूसरा चेहरा है शिक्षकों में उत्साह के अभाव का। उन पर नौकरशाही का दबदबा लगातार रहता है। जोड़तोड़ के बल पर अनेक शिक्षक अपना तबादला शहरी इलाकों में करा लेते हैं। उत्तर प्रदेश की आम सच्चाई है कि गांव का सरकारी स्कूल एक दो शिक्षकों के सहारे चलता है और शहर के स्कूलों में जरूरत से ज्यादा शिक्षक हैं। इस व्यवस्था के बीच कई अन्य समस्याएं बुदबुदाती रहती हैं, जैसे अधूरा वेतन पाने वाले पैरा शिक्षकों का असंतोष, स्कूल में साफ सफाई की समस्या, मरम्मत के लिए महीनों का इंतजार।
 कोर्ट की राय में सरकारी स्कूल इसलिए बदहाल हैं क्योंकि समाज में हैसियत रखने वालों की संतानें वहां से चली गई हैं। अगर अफसरों और नेताओं के बच्चे वहां पढ़ेंगे तो शिक्षकों की नियुक्ति और टूटी हुई छतों और खिड़कियों की मरम्मत अपने आप हो जाएगी। न्यायधीशों की यह समझ और आशा तर्कसंगत है। जब फीस लेकर चलने वाले प्राइवेट स्कूल नहीं थे तो अफसरों के बच्चे आम नागरिकों के बच्चों के साथ ही पढ़ते थे। इतना जरूर है कि तब आम नागरिकों में मजदूर और छोटे किसान शामिल नहीं थे। आज उनके बच्चे भी स्कूल जा रहे हैं। अफसर, नेता और मजदूर के बच्चे प्राइमरी स्कूल में साथ साथ पढ़ेंगे तो समाज का बंटवारा घटेगा, शिक्षा का स्तर भी सुधरेगा, छुटपन से अंग्रेजी थोपे जाने की समस्या भी सुलझेगी। इतनी बीमारियों का एक साथ इलाज सपने जैसे लगता है।
हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद यूपी के मंत्री, विधायक व अफसर अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ाने को हरगिज तैयार नहीं हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा तय समय सीमा 6 माह बीत जाने के बाद भी सरकार हाईकोर्ट के आदेश पर अमल की दिशा में आगे कदम नहीं बढ़ा पाई है। दरअसल वह इस व्यवस्था को लागू करने के पक्ष में नहीं है। राष्ट्रीय लोकदल के विधायक सुदेश शर्मा ने विधानसभा में एक सवाल के जरिये सरकार से जानकारी मांगी थी कि क्या इस व्यवस्था को लागू कराने के लिए कोई कार्य योजना तैयार की गई है? इस पर सरकार की ओर से लिखित जवाब दिया गया कि हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ न्याय विभाग के परामर्श से सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल करने का फैसला किया गया है। इस बाबत आदेश जारी कर दिए गए हैं। हालांकि बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है एसएलपी दायर करने के बारे में अभी कोई फैसला नहीं किया गया है। सचिव आशीष गोयल ने कहा कि अभी इस पर विचार−विमर्श चल रहा है।
आजादी के 67 वर्षों बाद भी आज तक एक भी सरकार यह नीति नहीं बना पाई कि मास्टरों और विधायक−कलक्टर एसपी के बच्चे सरकारी स्कूल में ही पढ़ेंगे। ऐसा होता तो देखते सरकारी स्कूलों का स्तर क्या होता? अब भी क्या मंत्री और विधायक यह संकल्प लेकर निर्णय कर सकते हैं? प्रदेश के किसी मास्टर से लेकर आईएएस का बच्चा सरकारी स्कूल में नहीं पढ़ता है। ऐसे में इनके हालात खराब होंगे ही। कानून के कई जानकार इस फैसले से इत्तेफाक नहीं रखते। उनका कहना है कि यह संविधान से मिले मौलिक अधिकार के खिलाफ है। उनका मत है कि जिन 40−50 लाख लोगों के बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ना जरूरी किया जा रहा है, वे सभी लोग प्राइमरी शिक्षा के खराब स्तर के लिए जिम्मेदार नहीं हैं। जो लोग जिम्मेदार हैं, सजा उन्हें दी जा सकती है, लेकिन उनके बच्चों को खराब स्कूल में पढ़ने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। यही नहीं इस पर अमल व्यवहारिक रूप से भी काफी मुश्किल होगा।
साभार— प्रभासाक्षी

सीडीओ पी.सी. श्रीवास्तव का आईएएस में हुआ प्रोन्नति

जौनपुर। विभागीय प्रोन्नति समिति द्वारा प्रदेश के २३ पीसीएस अधिकारियों को आईएएस कैडर दिया
गया। जिसमें जिले के मुख्य विकास अधिकारी प्रकाश चन्द्र श्रीवास्तव का भी चयन किया गया है। श्री श्रीवास्तव १९९४ बैच के पीसीएस अधिकारी है तथा मुख्य विकास अधिकारी के पद पर तीन वर्ष से कार्यरत है। श्री श्रीवास्तव के आईएएस कैडर मिलने पर अपर पुलिस अधीक्षक अरूण कुमार श्रीवास्तव, मुख्य चिकित्साधिकारी डा. आरके पोरवार, पीडी तेज प्रताप मिश्र, उपायुक्त मनरेगा रामबाबू त्रिपाठी, डीपीओ पवन कुमार यादव सहित जिले के अधिकारियों/कर्मचारियों ने खुशी जाहिर करते हुए बधाई दिया।

संकट कटे मिटे सब पीरा, जो सुमिरै हनुमत बलबीरा

महावीर के दर्शन को उमड़ी भक्तों की भीड़
रामचरित मानस पाठ के बाद हुआ भण्डारे का आयोजन
सिकरारा, जौनपुर। संकट कटे मिटे सब पीरा,जो सुमिरै हनुमत बलबीरा। अजोशी स्थित पावन महावीर धाम पर महावीर के दरबार में अपना संकट काटने, मनौती पूर्ण करने के लिए श्रद्धालुओं का रेला उमड़ पड़ा। प्रचण्ड धूप में भी हनुमत भक्तों की लम्बी कतार देर शाम तक लगी रही है। जय हनुमत जय राम कृपाला, जय
शिव शंकर दीन दयाला व घण्टा घड़ियाल की गूंज से पूरा क्षेत्र गुंजायमान हो गया। मंदिर प्रशासन की माने तो लगभग 20 से 25 हजार श्रद्धालुओं ने धाम में पहुंचकर मत्था टेका। भक्तों को प्रसाद वितरण के साथ भण्डारा कराया गया। दिन में लगभग 9 बजे ज्यों ही मन्दिर के प्रधान पुजारी अरविन्द मिश्र व जिले के अन्य विद्वान ब्राह्मणों द्वारा महाबीर के आरती की घोषणा की गयी तो सभी भक्त हाथ जोड़कर अपने स्थान से ही जयकारा लगाने लगे। घण्टा घड़ियाल, शंखनाद व जयकारे से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया। धाम के सेवक बेलगहन गांव निवासी पंडित गोरखनाथ मिश्र ने बताया कि भोर में चार बजे ही मंदिर का कपाट खोल दिया गया। जिससे दूर-दराज से आने वाले भक्तों को समस्या न हो। धाम पर जगह-जगह भक्त हनुमान चालीसा, बजरंग बाण, सुन्दर काण्ड का पाठ करते देखे गए। दर्शन-पूजन करने के बाद भक्त मंदिर की परिक्रमा कर जगह-जगह कराही चढ़ा रहे थे। पाण्डेपुर गांव निवासी उमेश तिवारी अपनी पत्नी वन्दना तिवारी व पुत्री साम्भवी व श्रीश तिवारी ने प्रसाद वितरण की सारी व्यवस्था कर रखी थी। मुख्यद्वार से निकलने वाले भक्तों को प्रसाद वितरित कर रही थी। धाम के पुजारी फौजदार शुक्ल, सहयोगी संजय सिंह व देवीसेवक जायसवाल के साथ समरनाथ यादव, सरोज व अन्य ग्रामीण भण्डारा व अन्य व्यवस्था में लगे रहे। सुरक्षा की दृष्टि से थानाध्यक्ष किशोर कुमार चौबे मड़ियाहूं फोर्स के साथ लगातार चक्रमण करते रहे। भण्डारे में स्वामीनाथ पाण्डेय, राजेश्वर प्रसाद पाण्डेय, रामपाल पाण्डेय आदि का सक्रिय योगदान रहा।

प्रार्थना पत्रों के निस्तारण हेतु 30 टीमें गठित

जौनपुर। जिलाधिकारी भानु चन्द्र गोस्वामी बदलापुर तहसील सभागार में आयोजित तहसील दिवस में सम्मिलित हुए। जिसमें 195 व्यक्तियों ने प्रार्थना पत्र दिया मौके पर ही 15 प्रार्थना पत्रों का निस्तारण हुआ। जिलाधिकारी ने तहसील दिवस में मिले प्रार्थना पत्रों के निस्तारण के लिए राजस्व विभाग के 56 शिकायत के
लिए 16 टीमें गठित किया। इसी प्रकार अन्य विभागों के 90 प्रार्थना पत्रों के निस्तारण के लिए 14 टीमें गठित की गयी। जिलाधिकारी ने सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि जांचकर आख्या आज शाम 7 बजे तक उपजिलाधिकारी बदलापुर ममता मालवीय को उपलब्ध करायें। जिलाधिकारी ने पुलिस अधिकारियों को तहसील दिवस के प्रार्थना पत्रों का निस्तारण तीन दिन के अन्दर करके उपजिलाधिकारी को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। जिलाधिकारी के निर्देश पर उपजिलाधिकारी ममता मालवीय के विशेष प्रयास से पिछले तहसील दिवस के सभी प्रार्थना पत्रों का निस्तारण कर दिया गया है। इस अवसर पर सीडीओ पीसी श्रीवास्तव, अपर पुलिस अधीक्षक अरूण कुमार श्रीवास्तव, पीडी तेज प्रताप मिश्र, मुख्य चिकित्साधिकारी डा. रविन्द्र कुमार पोरवार, सीवीओ डा. विरेन्द्र सिंह, उपनिदेशक कृषि अशोक उपाध्याय, जिला कृषि अधिकारी मनीष सिंह, एसडीएम ममता मालवीय, नायब तहसीलदार अरविन्द कुमार मिश्र एवं जिला स्तरीय अधिकारीगण उपस्थित रहे।

जिलाधिकारी ने किया विकलांग प्रमाण-पत्र कैम्प का निरीक्षण
जौनपुर। जिलाधिकारी भानु चन्द्र गोस्वामी ने मंगलवार को विकास खण्ड में चल रहे विकलांग प्रमाण-पत्र बनाने वाले स्थल विकास खण्ड महराजगंज कैम्प का निरीक्षण किया। उन्होंने खण्ड विकास अधिकारी को विकलांगों के बैठने तथा उनके प्रमाण पत्र बनवाने के लिए निर्देश दियाा। मुख्य चिकित्साधिकारी डा. आर के पोरवाल ने भी कैम्प का निरीक्षण किया। जिलाधिकारी के निर्देशानुसार महराजगंज विकास खण्ड में विकलांग प्रमाण-पत्र कैम्प में चिकित्सकों की टीमों द्वारा 801 विकलांगों का रजिस्टेªशन किया गया, जिसमें चिकित्सकों की देख-रेख में 615 हाथ, पैर, नेत्र विकलांगों का मौके पर ही प्रमाण-पत्र बनाया गया। तीन टीमों द्वारा विकलांगों का 80 आधार कार्ड भी बनाया गया। जिला विकलांग कल्याण अधिकारी राजेश सोनकर ने बताया कि 18 मई को विकास खण्ड सुजानगंज में प्रातः 8 बजे विकलांग प्रमाण पत्र का कैम्प लगाया जायेगा।

‘ग्राम उदय से भारत उदय’ कार्यक्रम 20 मई से

जौनपुर। केन्द्र सरकार की जनप्रिय योजनाओं की जानकारी जनता तक पहुंचाने के लिए भारतीय जनता पार्टी द्वारा 20 से 31 मई तक ग्राम उदय से भारत उदय कार्यक्रम का आयोजन किया गया है जिसमें जनपद के समस्त कार्यकर्ता हिस्सा लेंगे। यह जानकारी जिलाध्यक्ष सुशील कुमार उपाध्याय ने दी। उन्होंने बताया कि जनपद में बूथ संरचना का कार्यक्रम अपने अंतिम पड़ाव पर है जिसमें प्रत्येक बूथ पर बूथ प्रमुख, युवा प्रमुख एवं महिला प्रमुख की नियुक्ति हो चुकी है। इनके द्वारा प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, मुद्रा योजना, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, प्रधानमंत्री बीमा योजना सहित कई योजनाओं की जानकारी दी जायेगी। केन्द्र सरकार के कार्यकाल के दो वर्ष पूर्ण होने पर 25 मई को राज कालेज मैदान से मसाल जूलुस निकाला जायेगा। उन्होंने बताया कि 26 मई को प्रदर्शनी लगाया जायेगा जिसमेें केन्द्र सरकार के योजनाओं के बारे में जानकारी दी जायेगी। इसके साथ ही उज्ज्वला योजना का फार्म भी भरा जायेगा। इस अवसर पर हरीश चन्द्र सिंह, अशोक श्रीवास्तव, ईश्वरदेव सिंह, रामसिंह मौर्य, पुष्पराज, संदीप तिवारी, पंकज मिश्र, रघुराज सिंह, बांकेलाल सोनकर, अशोक सोनकर, दीपचंद राम, भैयाराम पटेल, डा. नृपेन्द्र सिंह, डा. जनार्दन सिंह, सतीश दूबे, अजीत प्रजापति, डा. विजय चंद पटेल, शशी मौर्य आदि लोग उपस्थित रहे।